Case Laws
हुरबा पेट्रो एवं अन्य बनाम भारत संघ (Hurba Petro & Others Vs. Union of India, 2026)
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस प्रश्न पर विचार किया कि UAPA की धारा 43D(2)(b) के अंतर्गत जांच अवधि को 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करने का आदेश क्या NIA Act की धारा 21 के तहत अपील योग्य है ?
उत्तर प्रदेश राज्य बनाम ए.के. गाबा व अन्य ( State of Uttar Pradesh Vs. A.K. Gaba & Others)
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 (1) (d) के तहत दोषसिद्धि के लिए "रिश्वत की मांग और उसकी स्वीकृति" का पुख्ता सबूत होना अनिवार्य है । केवल पैसे की बरामदगी किसी को दोषी बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है ।
वकीलों को जांच के दौरान समन जारी करने और वकील-मुवक्किल विशेषाधिकार से संबंधित ( Attorney-Client Privilege Case )
Supreme Court of India ने स्पष्ट किया कि पुलिस या जांच एजेंसियां किसी मामले में पेश हो रहे वकील को मामले की जानकारी जुटाने के लिए सीधे समन नहीं भेज सकतीं।
Harish Rana v. Union of India ( Active Euthanasia vs. Passive Euthanasia )
यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा 2026 में (मूल याचिका वर्ष 2025-2026) 'कॉमन कॉज 2018' और '2023' के दिशानिर्देशों के तहत पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) और 'राइट टू डाई विद डिग्निटी' (गरिमा के साथ मरने का अधिकार) की व्याख्या करते हुए दिया गया है।
Mihir Rajesh Shah Vs State of Maharastra : to communicate the grounds of arrest Case
सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी सवाल को स्पष्ट किया कि क्या गिरफ्तारी के आधारों को सूचित करने की संवैधानिक आवश्यकता सामान्य आपराधिक मामलों (BNS/IPC) पर भी लागू होती है और क्या ये आधार लिखित में दिए जाने अनिवार्य हैं।
V.K. Singh V/S C.B.I # Denied Access to or Copies of Documents U/ S 207 of the CrPC(Section-230 BNSS)
वी.के. सिंह ने CrPC की धारा 207(Section 230 BNSS )के तहत चार्जशीट में शामिल कुछ गोपनीय दस्तावेजों की प्रतियों की मांग की थी । निचली अदालत ने वकीलों की व्यक्तिगत कस्टडी की शर्त पर इसकी अनुमति दी थी, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए आदेश को बदल दिया और केवल अदालत में दस्तावेजों के निरीक्षण (inspection) की अनुमति दी।सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि केवल OSA लागू होने से निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) के लिए जरूरी दस्तावेज पाने का आरोपी का अधिकार खत्म नहीं होता ।
Shaurya Sunil Kumar Singh v. Central Bureau of Investigation
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि CBI ने BNSS की धारा 187(3) के अनुसार 60 /90 दिनों की अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी है, तो केवल इस आधार पर कि चार्जशीट की प्रतियां / दस्तावेज़ समय पर आरोपी को उपलब्ध नहीं कराए गए, आरोपी को Statutory Bail का अधिकार नहीं मिलेगा ।