हुरबा पेट्रो एवं अन्य बनाम भारत संघ (Hurba Petro & Others Vs. Union of India, 2026)
हुरबा पेट्रो एवं अन्य बनाम भारत संघ
(Hurba Petro and Others Vs. Union of India, 2026)
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने Hurba Petro and Others v. Union of India में इस प्रश्न पर विचार किया कि UAPA की धारा 43D(2)(b) के अंतर्गत जांच अवधि को 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करने का आदेश क्या राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम ( NIA Act ) की धारा 21 के तहत अपील योग्य है।
मुख्य मामला
यह मामला NIA द्वारा दर्ज एक UAPA प्रकरण से संबंधित था, जिसमें यूक्रेन के नागरिकों पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने और सशस्त्र समूहों के साथ षड्यंत्र करने का आरोप लगाया गया। NIA ने जांच पूरी करने के लिए विशेष न्यायालय से 90 दिनों की अवधि को बढ़ाकर 180 दिन करने की अनुमति मांगी, जिसे विशेष न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। इसके विरुद्ध अभियुक्तों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर की।
अभियुक्तों का तर्क था कि जांच अवधि बढ़ाने से उनका डिफॉल्ट बेल (Default Bail) प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार समाप्त हो गया, इसलिए यह आदेश अंतिम प्रभाव वाला है और इसके विरुद्ध अपील स्वीकार की जानी चाहिए। उन्होंने पूर्व के Anamul Ansari निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें जांच अवधि बढ़ाने से इनकार करने वाले आदेश को अपील योग्य माना गया था।
दूसरी ओर NIA ने कहा कि जांच अवधि बढ़ाने का आदेश केवल अंतरिम ( Interlocutory ) प्रकृति का है। इससे मुकदमे का अंतिम निर्णय नहीं होता और न ही पक्षकारों के अधिकारों का अंतिम निर्धारण होता है। इसलिए धारा 21 NIA Act के तहत ऐसी अपील सुनवाई योग्य नहीं है।
न्यायालय का निर्णय (Judgment)
उच्च न्यायालय ने विभिन्न न्यायिक निर्णयों का विश्लेषण करते हुए कहा कि जांच अवधि बढ़ाने का आदेश अभियुक्त के डिफॉल्ट बेल (Default Bail) के अधिकार को समाप्त नहीं करता, बल्कि केवल उसे 181वें दिन तक स्थगित करता है। इसलिए इस प्रकार का आदेश अंतिम या मध्यवर्ती आदेश नहीं बल्कि Interlocutory Order है। ऐसे आदेश के विरुद्ध धारा 21 के तहत अपील नहीं की जा सकती।
हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अभियुक्त इस आदेश को चुनौती देना चाहते हैं, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों का सहारा ले सकते हैं। इसी कारण न्यायालय ने अपील को समाप्त करते हुए उसे धारा 482 CrPC/धारा 528 BNSS के अंतर्गत याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया।
निष्कर्ष (Conclusion)
UAPA के अंतर्गत जांच अवधि बढ़ाने का आदेश अपील योग्य नहीं है, क्योंकि यह केवल अंतरिम आदेश है और डिफॉल्ट बेल (Default Bail) के अधिकार को समाप्त नहीं बल्कि स्थगित करता है।