FREE LEGAL AID SERVICES // NALSA // SLSA // DLSA // TLSC // निशुल्क विधिक सहायता सेवाएँ
निशुल्क विधिक सहायता सेवाएँ( FREE LEGAL AID SERVICES )
सरकार ने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम ,1987(Legal Services Authorities Act, 1987 ) के अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (National Legal Services Authority -NALSA) की स्थापना की है, ताकि समाज के गरीब और हाशिए पर रह गए वर्गों को निशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएँ प्रदान की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी नागरिक का न्याय प्राप्त करने का अवसर आर्थिक या अन्य कारणों से छिन न जाए। इसके अलावा इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित के लिए लोक अदालतों का आयोजन करना है कि कानूनी प्रणाली का संचालन समान अवसरों के आधार पर न्याय को बढ़ावा दे।
देश के कोने-कोने में लोगों तक पहुँच कायम करने के लिए, तालुका स्तर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक विधिक सेवा संस्थाएँ स्थापित की गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय में सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति (SCLSC) काम करती है, जबकि-
38 उच्च न्यायालय विधिक सेवा समितियाँ (HCLSCs),
37 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, (SLSAs)
707 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSAs) और
2440 तालुका विधिक सेवा समितियाँ (TLSCs) हैं।
विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा की जाने वाली गतिविधियों/कार्यक्रमों में विधिक सहायता और सलाह, कानूनी जागरूकता कार्यक्रम, कानूनी सेवा क्लीनिक,कानूनी साक्षरता क्लब,लोक अदालतें और पीड़ित मुआवजा योजना को लागू करना शामिल है।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (निशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएँ) विनियम, 2010[The National Legal Services Authority (Free and Competent Legal Services) Regulations, 2010 ] सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और तालुका विधिक सेवा समितियों सभी स्तरों पर निगरानी और मेंटरिंग समितियों के द्वाराविधिक सहायता सेवाओं की पुख्ता निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था प्रदान करता है। ये समितियाँ न्यायालय में मिलने वाली कानूनी सहायता की देखरेख करने, दिए गए मामलों की प्रगति पर नज़र रखने, तथा सूचीबद्ध वकीलों और विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता को गुणवत्तापूर्ण कानूनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए मार्गदर्शन देने के लिए उत्तरादयी हैं।
ये Monitoring and Mentoring Committeesविधिक सहायता वाले मामलों की रोज़ाना की प्रगति और अंतिम नतीजों को ट्रैक करने के लिए रजिस्टर रखती हैं। वे विधिक सहायता अधिवक्ताओं से समय-समय पर रिपोर्ट लेती हैं, उनके प्रदर्शन का आकलन करती हैं, और संतोषजनक प्रगति न होने पर संबंधित अधिकारियों को सुधार के कदम उठाने की सलाह देती हैं। लगातार फॉलो-अप करने की यह प्रणाली विधिक सेवा में जवाबदेही, पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करती है। एमएमसी खराब प्रदर्शन या अनुचित आचरण का पता लगाने के लिए अधिवक्ताओं के कामकाज का भी आकलन करतीहैं । इसके अलावा, SLSA के कार्यकारी अध्यक्ष के मार्गदर्शन में एलएडीसीएस के तहतप्रत्येक मानव संसाधन के प्रदर्शन का एसएलएसए द्वारा हर छह महीने में आकलन किया जाता है। इसके अलावा, एलएडीसी द्वारा किए गए मुकदमों के संबंध में किए गए कार्य कीमासिक रिपोर्टएसएलएसए की ओर से एनएएलएसए को भेजी जाती है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर रियल-टाइम निगरानी और डेटा आधारित आकलन सुनिश्चित होता है।
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Note : प्रकाशित सामग्री भारत सरकार के विभिन्न विभागों के द्वारा प्रकाशित अधिसूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। यह UPSC/ UPPSC/ BPSC/ MPPSC/ RPSC/ JPSC/UKPSC के प्रतियोगियों के लिए अत्यंत उपयोगी है ।
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By : Abhishal Prakashan , Prayagraj