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भारतीय न्यायपालिका का डिजिटल रूपांतरण ( Digital Transformation of Indian Judiciary )

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Abhishal Prakashan
Publisher • Published Aug 7, 2026

भारतीय न्यायपालिका का डिजिटल रूपांतरण

(Digital Transformation of Indian Judiciary)

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भारत की न्यायपालिका लंबे समय तक कागजी रिकॉर्ड, धीमी प्रक्रियाओं तथा सीमित तकनीकी संसाधनों पर निर्भर रही। न्याय को अधिक सुलभ, पारदर्शी, त्वरित एवं किफायती बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2007 में ई-न्यायालय मिशन मोड परियोजना (e-Courts Mission Mode Project) प्रारम्भ की गई। वर्तमान में यह परियोजना तीसरे चरण (2023–2027) में है, जिसमें AI, मशीन लर्निंग, OCR तथा डिजिटल न्याय प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है।

1.मुख्य उद्देश्य (Objectives)

  • न्यायिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण।
  • पेपरलेस एवं स्मार्ट न्यायालयों की स्थापना।
  • न्याय तक आसान एवं समान पहुंच सुनिश्चित करना।
  • पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाना।
  • लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण में सहायता।

2. ई-कोर्ट परियोजना के चरण (Phases of e-Courts Project)

A. चरण-I (2011–2015)

  • 14,000 से अधिक न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण।
  • नेटवर्क एवं ICT अवसंरचना का विकास।

B. चरण-II (2015–2023)

  • National Judicial Data Grid (NJDG) की शुरुआत।
  • e-Filing एवं e-Sewa केंद्रों की स्थापना।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार।

C. चरण-III (2023–2027)

  • AI एवं मशीन लर्निंग का उपयोग।
  • रिकॉर्ड्स का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण।
  • पेपरलेस एवं वर्चुअल न्यायालय।
  • न्याय संस्थानों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी।

3. प्रमुख उपलब्धियां (Major Achievements)

  • 1,806 e-Sewa केंद्र स्थापित।
  • 4,519 न्यायालयों में e-Filing।
  • 7,553 संस्थानों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा।
  • 6,895 न्यायालयों में NSTEP।
  • 474 पेपरलेस न्यायालय।
  • 538 वर्चुअल कोर्ट हेतु डिजिटल अवसंरचना।
  • सभी उच्च न्यायालय ICJS से जुड़े।

4. National Judicial Data Grid (NJDG)

  • लंबित एवं निस्तारित मामलों की रियल-टाइम जानकारी।
  • न्यायिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही में वृद्धि।
  • नीति निर्माण एवं न्यायालय प्रबंधन में सहायक।

5. e-Filing की विशेषताएं

  • ऑनलाइन याचिका दाखिल।
  • e-Sign एवं ऑनलाइन भुगतान।
  • वीडियो शपथ।
  • केस ट्रैकिंग डैशबोर्ड।
  • 30 जून 2026 तक1.25 करोड़ से अधिक मामले ऑनलाइन दायरतथा₹1,404 करोड़ न्यायालय शुल्कका ऑनलाइन भुगतान।

6. वर्चुअल न्यायालय एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

  • 4.18 करोड़ से अधिक वर्चुअल सुनवाई।
  • 31 Virtual Courts द्वारा 11.33 करोड़ ट्रैफिक चालानों का निपटान।
  • 11 उच्च न्यायालयों में Live Streaming।

7. Interoperable Criminal Justice System (ICJS) : ICJS निम्न प्रणालियों को जोड़ता है—

  • CCTNS
  • e-Prison
  • e-Prosecution
  • e-Sakshya
  • e-Summons
  • e-Forensic
  • NAFIS
  • Nyaya Shruti
  • MedLEaPR

इससे पुलिस, न्यायालय, जेल एवं फॉरेंसिक संस्थानों के बीच डिजिटल सूचना आदान-प्रदान संभव हुआ है।

8. e-Sewa केन्द्रों की भूमिका

  • केस की स्थिति बताना।
  • e-Filing में सहायता।
  • e-Payment एवं e-Stamp सुविधा।
  • मुफ्त विधिक सहायता का मार्गदर्शन।
  • Virtual Court एवं eMulakat सहायता।

9. AI एवं डिजिटल नवाचार (AI Initiatives)

  • LegRAA (Legal Research Assistant)
  • Digital Courts 2.1
  • ASR-SHRUTI
  • PANINI Translation Tool
  • eSCR द्वारा 18 भारतीय भाषाओं में निर्णयों का अनुवाद।

ई-न्यायालय मिशन ने भारतीय न्यायपालिका को कागज-आधारित प्रणाली से डिजिटल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित व्यवस्था में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। AI, डिजिटल रिकॉर्ड, e-Filing तथा Virtual Courts जैसी पहलें न्याय वितरण को अधिक तेज, सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बना रही हैं। [SOURCE : 7AUG2026PIB]