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लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026 Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Act, 2026

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Abhishal Prakashan
Publisher • Published Aug 1, 2026

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026

Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Act, 2026

भारत में सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने और पेपर लीक तथा संगठित परीक्षा घोटालों पर रोक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026’ बनाया है। यह अधिनियम 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त, प्रभावी और समयबद्ध बनाने के लिए है।

1. कठोर दंड और आर्थिक जुर्माना

संशोधन अधिनियम के तहत परीक्षा में धांधली और संगठित अपराधों में शामिल व्यक्तियों, सेवा प्रदाताओं और गिरोहों के लिए सज़ा व जुर्माने की अवधि काफी बढ़ा दी गई है।

व्यक्तिगत अपराधी: 5 से 10 वर्ष तक का कारावास और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना ।

सेवा प्रदाता (Service Providers) : 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना तथा किसी भी लोक परीक्षा को आयोजित करने पर 8 वर्ष का प्रतिबंध ।

निदेशक/वरिष्ठ प्रबंधन:5 से 10 वर्ष तक का कारावास और 5 करोड़ रुपये का जुर्माना।

संगठित अपराध सिंडिकेट:7 से 10 वर्ष तक का कठोर कारावास और कम से कम 10 करोड़ रुपये का जुर्माना ।

2. समयबद्ध और केंद्रित जांच (Special Task Force)

केंद्र सरकार को परीक्षा घोटालों की जांच के लिए विशेष कार्यबल (Special Task Force - STF) गठित करने का अधिकार दिया गया है।एफआईआर (FIR) दर्ज होने, मामला केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपे जाने या विशेष कार्यबल को निर्देश मिलने की तिथि सेदो माह के भीतर जांचपूरी करना अनिवार्य होगा।

3. विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय और त्वरित न्याय

प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से सत्र न्यायालयों को ‘विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय’ के रूप में अधिसूचित किया जाएगा।मुकदमों की सुनवाई बिना किसी अनावश्यक स्थगन के प्रतिदिन की जाएगी।चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से3 माह के भीतर सुनवाईपूरी कर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। लंबित मामलों को भी फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर कर 3 महीने के अंदर निपटाया जाएगा।मुकदमों की प्रभावी पैरवी के लिए विशेष वकीलों की नियुक्ति की जाएगी।

4. उच्च न्यायालय में समयबद्ध अपील प्रक्रिया

विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय के फैसलों के खिलाफ केवल उच्च न्यायालय (High Court) की दो जजों की पीठ (Bench) के समक्ष अपील की जा सकेगी।

अपील 30 दिनों के भीतर दर्ज करनी होगी (विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 90 दिन)।उच्च न्यायालय को अपील स्वीकार होने के 3 माह के भीतर निपटारा करने का प्रयास करना होगा। इसके अलावा किसी अन्य अदालत में पुनरीक्षण (Revision) याचिका स्वीकार नहीं होगी।

निष्कर्ष :यह संशोधन अधिनियम देश के लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य और मेहनत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम है। जांच से लेकर न्यायिक प्रक्रिया तक सख्त समय-सीमा तय होने से मुकदमे सालों तक लंबित नहीं रहेंगे। इससे पेपर लीक माफिया और परीक्षा सिंडिकेट्स में डर पैदा होगा तथा लोक परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी। 01082026

Status

Introduced in Lok Sabha : July 27, 2026

Passed by Lok Sabha : July 29, 2026

Passed by Rajya Sabha: July 30, 2026

Presidential Assent : July 31, 2026